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सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल पांचवीं बार राज्यसभा

onenews.co.in
देश के दो बड़े राजनीतिक दल कांग्रेस और बीजेपी की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका गुजरात राज्यसभा चुनाव में आखिर कांग्रेस की जीत हुई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल पांचवीं बार राज्यसभा के लिए चुने गये हैं।
वहीं गुजरात की तीन राज्यसभा सीटों में से दो पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने जीत दर्ज की है। एक पर पार्टी को हार मिली।
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी राज्यसभा के लिए चुने गये हैं। तीसरी सीट पर बीजेपी ने अहमद पटेल के खिलाफ बागी कांग्रेसी नेता बलवंत सिंह राजपूत को उतारा था, जिन्हें हार का सामना करना पड़ा है। स्मृति ईरानी और अमित शाह को 46-46 वोट मिले।
रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा, 'कांग्रेस के अहमद पटेल को 4400 वोट मिले। बीजेपी के अमित शाह को 4600 और स्मृति ईरानी को भी 4600 वोट मिले।' उन्होंने कहा कि बलवंत सिंह राजपूत को 3800 वोट मिले।
जीत की खबर के बाद अहमद पटेल ने ट्विट कर कहा, 'सत्यमेव जयते। यह केवल मेरी जीत नहीं है। यह पैसे की शक्ति, बाहुबल और राज्य मशीनरी के दुरुपयोग की हार है।' पटेल ने कहा, 'मैं सभी विधायकों और पार्टी नेतृत्व को धन्यवाद कहना चाहता हूं। सभी ने परिवार की तरह काम किया।'
उन्होंने गुजरात राज्यसभा चुनाव को अपने राजनीतिक करियर का सबसे कठिन चुनाव बताया। पटेल ने कहा कि पता नहीं बीजेपी ऐसा क्यों कर रही है?

चुनाव के अंतिम परिणाम से ठीक पहले कांग्रेस ने अपने दो बागी विधायकों की गलती को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत की थी। चुनाव आयोग ने अपने पूर्व फैसले को देखते हुए कांग्रेस के दो बागी विधायकों के वोटों को रद्द कर दिया। कांग्रेस ने वोटों को रद्द करने की मांग की थी।
वोट रद्द होने से अहमद पटेल को फायदा
कांग्रेस का यह आरोप था कि उसके दो विधायक राघवजी पटेल और भोला पटेल ने वोट डालते समय बीजेपी नेताओं को अपनी पर्ची दिखाई थी। जिसके बाद कांग्रेस ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की थी।

गुजरात विधानसभा में 182 सीटें हैं, जिनमें से 176 विधायकों ने सोमवार को राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग की। दो कांग्रेसी विधायकों के वोट रद्द होने के बाद 174 वोट मान्य हुए। ऐसे में जीत के लिए अहमद पटेल को 43.5 यानि 44 वोटों की जरूरत थी जो उन्हें मिले।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पटेल को इससे पहले चार बार राज्यसभा सदस्य चुने जाने में किसी तरह की अड़चन नहीं आई थी, लेकिन इस बार यह उनके राजनीतिक करियर की संभवत: सबसे कड़ी लड़ाई थी।
क्रॉस वोटिंग
बीजेपी के तोड़फोड़ से बचाने के लिए बेंगलुरू भेजे गए 44 कांग्रेस विधायकों में पटेल को 42 विधायकों के ही वोट मिले। मतदान के दौरान कांग्रेस के दो विधायकों ने बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया, वहीं कांग्रेस को समर्थन का वादा करने वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के एक विधायक ने भी क्रॉस वोटिंग की। वहीं जेडीयू के एक विधायक ने पार्टी लाइन से हटकर अहमद पटेल को वोट दिया।
बीजेपी के एक विधायक ने भी क्रॉस वोटिंग की और कांग्रेस को वोट दिया। बीजेपी विधायक नलिन कोटादिया ने फेसबुक पर लिखा, 'पाटिदार आंदोलन के दौरान 14 लोगों की मौत हुई। जिसके खिलाफ मैंने बीजेपी के खिलाफ वोट किया।'
चुनाव आयोग में चहलकदमी
कांग्रेस के बागी विधायकों की इस हरकत को लेकर ही सारी राजनीतिक घमासान शुरू हुई, जिसके खिलाफ कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से शिकायत कर उनके मतों को अवैध करार दिए जाने की मांग की। आयोग ने शिकायत मिलने के बाद मतों की गणना रोक दी।
इसे लेकर राजधानी दिल्ली में भी दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने राजनीतिक दांव-पेंच शुरू कर दिए हैं। दोनों ही दलों ने तीन घंटे के अंदर तीन बार आयोग का दरवाजा खटखटाया।
कांग्रेस द्वारा आयोग से शिकायत करने के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में भाजपा के वरिष्ठ मंत्रियों ने आयोग से मुलाकात की और कांग्रेस पर चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगाया।
बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत कोई भी मतदान संपन्न होने के बाद चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

आयोग से बैठक के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने पत्रकारों को बताया कि अगर किसी पक्ष को कोई भी शिकायत है तो अदालत में याचिका दायर करना एकमात्र विकल्प है। प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस को सुबह कोई आपत्ति नहीं थी और तब उन्होंने दोनों विवादित मतों को रद्द किए जाने की मांग नहीं की।
इसके बाद गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में कांग्रेस के भी वरिष्ठ नेताओं का एक दल आयोग से मिला और हरियाणा और राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के दौरान घटी इसी तरह की घटना के आधार पर अपने दोनों बागी विधायकों के वोट रद्द किए जाने की मांग की।
पत्रकारों से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि उनके पास इसके वीडियो सबूत हैं कि दोनों बागी कांग्रेस विधायकों ने अपने मतपत्र अनिधारिक लोगों को दिखाए।
चिदंबरम ने कहा, 'हमें पता चला है कि निर्वाचन अधिकारी निर्वाचन आयोग के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। इस मामले में एकमात्र संवैधानिक प्राधिकारी निर्वाचन आयोग है।' मतदान पूरा होने के बाद पटेल ने दुखी मन से कहा, 'मैं आशावादी हूं, मुझे पूरा विश्वास है।'

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