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बक्सर के राम आधार तिवारी ने किया गीता का हुआ अंग्रेजी में अनुवाद

 बक्सर के  राम आधार तिवारी ने किया गीता का हुआ अंग्रेजी में अनुवाद
  onenews.co.in 
 राम बालक राय 

  विद्वानो का मत है कि  इस मायावी संसार में तीन तरह के महापुरुष अवतरित होते हैं. एक   इतिहास बनाने वाले  दूसरे जिन्हें इतिहास बनाता है और तीसरे जो खुद इतिहास बन जाते हैं. 
 इसी कड़ी में  बहुआयामी प्रतिभा के धनी, विद्वान रामाधार तिवारी 'आधार' अपने कृतित्व के दम पर इतिहास पुरुष  बनने का काम किया है.बक्सर के ब्रह्मपुर प्रखंड के रघुनाथपुर के   रिटायर्ड शिक्षक श्री तिवारी ने भागवत गीता का अंग्रेजी मुक्तछंद में अनुवाद कर  एक नया कृतिमान रचा  है. वे दुनिया के दूसरे व्यक्ति हैं, जिन्होंने गीता को मुक्त छंद में अंगरेजी में अनुवादित किया है. इसके पहले वर्ष 1875 ई. में काशीनाथ त्रिंबक तेलंग द्वारा यह कार्य किया गया था. 'गीता द इंगलिश वर्सेस' नामक पुस्तक में धर्म, अनुशासन व दार्शनिक बिंदुओं पर नोट्स भी अंगरेजी में मुक्तछंद रूप में अनुवादित किये गये हैं. पुस्तक दिल्ली के आयन प्रकाशन से प्रकाशित है. प्रथम संस्करण में इसकी 150 प्रतियां छपी हैं.

ताकि मूल तत्व समझ सकें लोग 
गीता के अंगरेजी अनुवाद के उद्देश्य के संबंध में श्री तिवारी ने बताया कि आदमी की सबसे मुख्य पहचान उसके बोलने की शक्ति है. अपने मन के सुख दुःख की बात दूसरे को बताने का माध्यम भाषा है. अगर संसार के सभी लोग एक ही भाषा बोलते तो सभी एक दूसरे की बात आसानी से समझ जाते, लेकिन ऐसा नहीं है. भारत की पौराणिक ग्रंथों की भाषा संस्कृत है. हजारों वर्ष पूर्व लिखा गया श्रीमद्भागवत गीता आज भी प्रासंगिक है. असंख्य ऐसे लोग हैं, जो गीता के मूल तत्व को जानने की इच्छा रखते हैं, लेकिन भाषायी व्यवधान के कारण यह संभव नहीं हो पाता है. इसलिए गीता के मूल तत्व को इसके मुक्त छंद रूप में अनुवाद किया गया है.

आर्थिक तंगहाली में छूटी पढ़ाई

रामाधार तिवारी 'आधार' मूलतः पटना जिले के उस्फा के रहनेवाले हैं. उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई पटना से की, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी. हालांकि, इसके बाद ब्रह्मपुर के बक्सर  उच्च विद्यालय में नौकरी हो गयी. तब से ब्रह्मपुर में ही बस गये. उनकी अन्य कृतियों में अंगरेजी पोएट्री 'गोल्डन डिअर' (2010), एक मुट्ठी जिंदगी(2011) व फिलासफी ऑफ लिटरेचर (2013) में प्रकाशित हुई थी. 

आज हुआ  विमोचन
पुस्तक का विमोचन रघुनाथपुर में आज पूर्व मंत्री ऋषिकेश तिवारी के हाथों किया गया। 
मौके पर हिंदी व अंगरेजी के कई विद्वानों के अलावे जैन कॉलेज आरा के प्रो उमाशंकर पांडेय, विश्वनाथ पांडेय, प्रो गंगेश्वर पांडेय, डॉ कमल सिंह, विंध्याचल शाही व अन्य मौजूद थे।

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