Skip to main content
देवयानी बोलीं- अब शायद ही कभी अपने पति के साथ अमेरिका में रह पाऊं
नई दिल्ली. भारतीय राजनयिक देवयानी खोब्रागडे को राजनयिक छूट देने से अमेरिका ने इनकार कर दिया है। साथ ही अमेरिका ने उन्हें भविष्य में वीजा देने से भी मना किया है। भारत वापस लौटने के बाद देवयानी ने इस केस में बनी अनिश्चितताओं पर दुख जताते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को मिस (याद) कर रही हैं। देवयानी ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि अब वे शायद ही कभी अपने पति और बच्चों के साथ अमेरिका में रह पाएं।  
 
देवयानी ने कहा, 'यदि मेरे बच्चे पढ़ने और काम करने के लिए अमेरिका का चुनाव करते हैं तो क्या होगा? क्या होगा यदि मैं कभी अमेरिका वापस न लौट सकूं? वैसे भी मैं फिलहाल वहां नहीं लौट सकती, क्या इसका मतलब यह नहीं कि मैं कभी अपने परिवार के साथ अमेरिका में नहीं रह पाऊंगी।'
 
देवयानी ने कहा कि उनके दिमाग में इस समय सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार को लेकर हैं। साथ ही वह अपने करियर को लेकर भी चिंतिंत हैं। देवयानी ने कहा, 'मैं अपने देश वापस लौट आई हूं। मेरा समर्थन करने वाले लोगों के बीच आकर मैं खुश हूं लेकिन अभी कानूनी लडाई जारी है।  मैं भारत आ गई हूं लेकिन मैं पक्ष अभी भी वही है। साथ ही मैं अपने परिवार को छोड़कर आई हूं। अपने बच्चों से दूर रहकर मैं काफी तनाव में हूं' 
देवयानी के परिवार में उनके पति के अलावा सात साल और चार साल की दो बेटियां है। देवयानी के पति अमेरिका में द र्शनशास्त्र के प्रोफेसर है। 
 
देवयानी का कहना है कि अमेरिका में उनके साथ हुआ यह विवाद पेशेवर नुकसान से ज्यादा उनके लिए निजी तौर पर भी बड़ा घाटा है। देवयानी का कहना है 'मेरे छोटे बच्चे पहले कभी मुझसे थोड़ी देर के लिए भी अलग नहीं हुए। मेरे मासूम बच्चे सोच रहे हैं कि मैं कभी भी वापस अपने उसी घर में लौट सकती हैं। हालांकि सच यह है कि मैं उसी घर में कभी नहीं लौट सकूंगी। मैंने थोड़ी देर पहले ही अपने बच्चों से बात की है।'

Comments

Popular posts from this blog

युवाओ के प्रेरणास्रोत: स्वामी विवेकानंद को शत शत नमन .  12 जनवरी 2013 स्वामी विवेकानंद की 150 वीं जयंती : राष्ट्रिय युवा दिवस।   युवाओ के सच्चे मार्गदर्शक के रूप में अपने देश को एक देवतुल्य इंसान मिला . इन्हें दार्शनिक , धार्मिक ,स्वप्न दृष्टा  या यो कहे की भारत देश की सांस्कृतिक सभी अवधारणा को समेटने वाले स्वामी विवेकानंद अकेले व असहज इंशान थे .इन्हें एक सच्चा यायावर संयाशी  भी कहा जाता है  हम युवा वर्गे इनकी सच्ची पुष्पांजलि तभी होगी जब हमारे  देश में आपसी द्वेष व गरीबी भाईचारा आदि पर काबू पा लेंगे .हम युवाओ के लिए स्वामी जी हमेशा प्रासंगिक रहेंगे .देश के अन्दर कई जगहों पर इनके नाम पर कई संस्थाए कार्यरत है उनके बिचारो को आम आदमी तक पहुचाने का बीरा हम युवा साथी के कंधो पर है . विश्व के अधिकांश देशों में कोई न कोई दिन युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में स्वामी विवेकानन्द की जयन्ती , अर्थात १२ जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णयानुसार सन् 1985 ई. को अन्तरराष्ट्रीय...
धरती पर ढ़ेरो आते है यायावर ,पर कुछ ही होते है कर्पूरी जैसे कद्दावर  कल्पना कीजिए कि किसी विधायक के पिता को कोई सामंती डंडे से इतना पीटे कि वह जमीन पर गिर पड़ें और उसके पैरों को पकड़ कर दया की भीख मांगे. लेकिन जब इस घटना की भनक विधायक पुत्र और प्रशासन को लगी होगी तो अंजाम क्या हुआ होगा ? कुछ नहीं ! इतना ही नहीं उस सामंती को सजा दिलाने के बदले खुद वह विधायक असाधारण महानता दिखाते हुए अपने पिता की ओर से सामनती से माफी मांगे . यह घटना जुड़ी है बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर से. बड़े भावुक अंदाज में इस घटना का जिक्र कर्पूरी ठाकुर के बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री रामनाथ ठाकुर सुनाते हुए कहते हैं “बाबू जी ने जिस दिन 1952 में विधानसभा की सीट जीती उस दिन उनके पिता गोकुल ठाकुर जश्न मनाने लगे और देर हो गई. इस कारण वह अपने महाजन (रामनाथ को उस आदमी का नाम याद नहीं) की दाढ़ी बनाने देर से पहुंचे. बस क्या था उस सामंती का क्रोध जाग उठा और उसने मेरे दादा को बेरहमी से पीटा. जब इसकी खबर कर्पूरी बाबू को मिली तो उन्होंने पुलिस अधिकारियों को आगाह किया कि वे उनके निजी मामले में न पड़ें, ...

'तेजस' विमान की नींव रखने वाले दरभंगा के वर्मा को मिला पद्म श्री

बिहार वन न्यूज़ डेस्क।  बिहार के दरभंगा के  डॉ मानस बिहारी वर्मा को पद्म श्री अवॉर्ड देने की घोषणा से मिथिलांचलवासी फुले नहीं समां रहे   है। हाल में एयरफोर्स के बेड़े में शामिल 'तेजस' विमान की नींव रखने वाले वैज्ञानिकों में एक वैज्ञानिक डॉ मानस बिहारी वर्मा भी इसी गांव से हैं।ज्ञात हो कि समस्तीपुर पूसा स्थित डॉक्टर राजेंदर प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में आना था। वही उनके खासे मित्र मानस बिहारी वर्मा से भी मिलने कार्यक्रम था। इस क्रम में उनका आदेश था की श्री वर्मा को जानकारी दी जाय की राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे कलाम साहब आपसे मिलना चाहते है। तत्कालीन जिलाधिकारी महोदय दरभंगा में। .......खोजा गया।  तब जाकर दोनों की मुलाकात हुई। दोनों महापुरुषो की मुलाकात का नतीजा हुआ की मिथिलांचल की धरती दरभंगा में पहली वॉर 21 स्कूलों के बच्चे आमने सामने अपने राष्ट्रपति अंकल से प्रत्यक्ष बात किये। आजभीइस दिशा में ऑगस्ट फाउंडेशन कीओरसे कार्यकाल रहा है।      -डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के निकटतम सहयोगी रहे। -2005 में एलसीए के प्रोग्राम डायरेक्टर ...