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हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में शिरकत करने के लिए पाकिस्तान राजी हो गया है। दरअसल भारत में होने जा रहे ‘हार्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन में मेजबानी

         
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  दिसंबर में हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में शिरकत करने के लिए पाकिस्तान राजी हो गया है। दरअसल भारत में होने जा रहे ‘हार्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन में मेजबानी के लिए इस बार ऐतिहासिक शहर अमृतसर को चुना गया है। यह सम्मेलन 3 दिसंबर को होगा। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त रूप से इस सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। इसमें अमेरिका, रूस, चीन और तुर्की समेत 17 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के भी भाग लेने की संभावना है।
                                    हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल प्रक्रिया’ की स्थापना अफगानिस्तान और तुर्की की पहल पर साल 2011 में हुई थी। इसका मुख्य मकसद सहयोग और कनेक्टिविटी के लिए प्रयासों को बढ़ावा देना है, ताकि अफगानिस्तान और क्षेत्र में दीर्घकालीन शांति और स्थिरता के साथ-साथ प्रगति और विकास को बढ़ावा मिल सके।

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने पुष्टि की है कि उनका देश सम्मेलन में शिरकत करेगा। जम्मू-कश्मीर के उड़ी नगर में एक सैन्य शिविर पर हमले में 19 भारतीय जवानों के प्राण लिए जाने से भारत-पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव के बीच की गई इस घोषणा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
 
विदेश विभाग प्रवक्ता नफीस जकारिया ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य अन्य क्षेत्रीय देशों के सहयोग के साथ अफगानिस्तान का विकास करना है, जो अफगानिस्तान में शांति एवं स्थिरता की हर कोशिश का समर्थन का पाकिस्तान की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।
 
आपको बता दें कि एचओए की मेजबानी पिछले साल दिसंबर में पाकिस्तान ने की थी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसमें शिरकत की थी। इसके बाद उनकी सरताज अजीज के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी हुई थी। दोनों पक्षों ने व्यापक द्विपक्षीय वार्ता बहाल करने की भी घोषणा की थी. लेकिन पठानकोट समेत कई आतंकी हमलों के कारण ये शुरू नहीं हो सकी। हाल ही में भारत ने इस्लामाबाद में होने वाले सार्क शिखर सम्मेलन का भी बहिष्कार कर दिया था।

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