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डॉ विजय संघवी अमेरिका के सिनसिनाटी में मेडिकल जगत

 में जाने-पहचाने नाम हैं. उनके और उनकी पत्नी डॉ खुशमन संघवी के नाम पर सिनसिनाटी विश्वविद्यालय में एक मेडिकल चेयर की स्थापना की गयी है, जिसके लिए दंपती ने करोड़ों रुपये का दान दिया है. इस पैसे से न केवल शोधकर्ताओं को शोध के लिए पैसे दिये जायेंगे, बल्कि कॉर्डियोलॉजी इमेजिंग तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा सकेगा. 
भारतीय मूल के अमेरिकी डॉक्टर दंपती डॉ विजय संघवी और डॉ खुशमन संघवी ने अमेरिका के सिनसिनाटी विश्वविद्यालय में एक चेयर स्थापित करने के लिए 12 करोड़ 60 लाख रुपये (20 लाख डॉलर) का दान दिया है. विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ मेडिसिन में स्थापित होनेवाली इस चेयर को ‘डॉ विजय एंड खुशमन संघवी इनडोएड चेयर इन कार्डियक इमेजिंग’ या संघवी चेयर के नाम से जाना जायेगा. इसका मुख्य उद्देश्य कार्डियेक एडवांस्ड इमेजिंग प्रोग्राम को सपोर्ट करना है. डॉ संघवी भारतीय मूल के पहले अमेरिकी हैं, जिन्होंने सिनसिनाटी विश्वविद्यालय में चेयर की स्थापना की है.
कार्डियोलॉजी में फेलोशिप : संघवी चेयर विश्वविद्यालय के कार्डियोवैस्कुलर विभाग के किसी फैकल्टी को फेलोशिप दी जायेगी, जिसका मुख्य मकसद शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना है. खास कर कार्डियोलॉजी में फेलोशिप दिये जायेंगे ताकि क्लिनिकल रिसर्च में अधिक से अधिक एडवांस इमेजिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा सके.
चिकित्सा जगत में सक्रिय : डॉ विजय संघवी सिनसिनाटी के चिकित्सा क्षेत्र में एक प्रमुख नाम रहे हैं. वह जेविश अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में 1971 से 1990 तक मेडिकल डायरेक्टर रहे हैं. आज कार्डियोलॉजी में जिन नयी कोर तकनीकों का प्रयोग किया जाता है, उसे सबसे पहले डॉ संघवी ने ही सिनसिनाटी में प्रयोग किया था. डॉ संघवी बताते हैं कि कार्डियोलॉजी में प्रयुक्त होनेवाली नयी तकनीकें, उसके क्रमिक विकास और नाटकीय वृद्धि से हृदय संबंधी बीमारियों को ठीक करने में बड़ी सफलता मिली है. डॉ संघवी जेविश अस्पताल से अलग होने के बाद 1990-2003 तक प्राइवेट में प्रैक्टिस करते रहे. पिछले साल वह सिनसिनाटी विश्वविद्यालय के ‘माइंड-बॉडी इंटरफेस इन हेल्थ एंड हिलिंग लेक्चरशिप’ कार्यक्रम से भी जुड़े.
गुजरात विश्वविद्यालय से डिग्री : डॉ विजय संघवी ने गुजरात विश्वविद्यालय से मेडिकल की डिग्री प्राप्त की है. उन्होंने ओंटारियो के मैक मास्टर विश्वविद्यालय और क्विंस विश्वविद्यालय के पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग ली है. 1964 में उन्होंने इंटर्नल मेडिसिन में रेसिडेंसी ट्रेनिंग और बोर्ड सर्टिफिकेशन कोर्स पूरा किया. 1975 में उन्होंने अमेरिकी बोर्ड के कार्डियोवैस्कुलर प्रोग्राम को पूरा किया. उन्हें अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी, रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सजर्स ऑफ कनाडा और सोसाइटी फॉर कार्डियक एंजियोग्राफी एंड इंटरवेंशन की तरफ से फेलोशिप भी मिली है.
मॉडल बनते भारतीय अमेरिकी : दुनिया की मशहूर पत्रिका फोर्ब्स ने भारतीय मूल के अमेरिकियों को अल्पसंख्यक समुदाय में सबसे बेहतर मॉडल माना है. चीनी, जापानी और कोरियाई मूल के मुकाबले भारतीय मूल के अमेरिकी न केवल अपनी प्रतिभा के बल पर अपना डंका पीट रहे हैं, बल्कि वे अपनी सभ्यता-संस्कृति के बूते अमेरिकियों के दिलों में भी जगह बना रहे हैं.

भारत में ठीक उलट स्थिति : भारत में चिकित्सा जगत में भले ही उल्लेखनीय वृद्धि हुई हो और दुनिया भर में भारत को मेडिकल डेस्टिनेशन के रूप में देखा जाता हो, पर अपने कार्यो से मॉडल बनने के मामले यदा-कदा ही दिखते हैं. भारत में पढ़ाई करने वाले अधिकांश डॉक्टर अच्छे वेतन और सुविधाओं के लिए विदेश चले जाते हैं. यहां के किसी विश्वविद्यालय में फैकल्टी के लिए चेयर स्थापित करने की बात कभी नहीं सुनी जाती. डॉ संघवी के प्रयासों से भारत के डॉक्टर भी प्रेरणा ले सकते हैं.

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